आदर्श सिंह ने रचा इतिहास: 26 गेंदों में 100 से 200, नाबाद 223 रनों की धमाकेदार पारी
आदर्श सिंह ने रचा इतिहास: 26 गेंदों में 100 से 200, नाबाद 223 रनों की धमाकेदार पारी
भारतीय घरेलू क्रिकेट में हर साल कई युवा खिलाड़ी उभरते हैं, लेकिन कुछ ही ऐसे होते हैं जो अपने खेल से दर्शकों और विशेषज्ञों को चौंका देते हैं। उत्तर प्रदेश के युवा सलामी बल्लेबाज़ आदर्श सिंह ने हाल ही में ऐसा ही प्रदर्शन किया है। उनकी यह पारी न सिर्फ मैच को एकतरफा बना गई, बल्कि भारतीय क्रिकेट में एक नई सनसनी के तौर पर उनका नाम उभर कर सामने आया है।
क्वार्टर-फाइनल मुकाबले में आदर्श सिंह ने मात्र 138 गेंदों में नाबाद 223 रन ठोक डाले। इस पारी की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि उन्होंने पहले 100 रन सामान्य गति से बनाए लेकिन उसके बाद ऐसा रफ्तार दिखाई कि क्रिकेट जगत दंग रह गया। उन्होंने 100 से 200 रन तक का सफर केवल 26 गेंदों में पूरा किया — जो अपने आप में एक अद्भुत और दुर्लभ रिकॉर्ड जैसा है।
धीमी शुरुआत, लेकिन तूफ़ानी अंत
हालांकि उनकी पारी की शुरुआत काफी संयमित रही। शुरुआती ओवरों में उन्होंने विकेट बचाते हुए गेंदबाज़ों का आकलन किया। लगभग 40–50 रन तक उनकी स्ट्राइक रेट साधारण थी, लेकिन जैसे ही एक बार उन्होंने क्रीज़ पर जमकर गेंदबाज़ों की लय समझ ली, पारी का रंग बदलने लगा। उन्होंने स्पिनरों पर आक्रमण शुरू किया, और फिर तेज़ गेंदबाज़ भी उनकी मार से नहीं बच पाए।
उनका पहला अर्धशतक 67 गेंदों में आया, जबकि शतक लगभग 103 गेंदों में। यही वह मोड़ था जहां से उन्होंने मैच की दिशा पूरी तरह बदल दी।
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| आदर्श सिंह ने रचा इतिहास: 26 गेंदों में 100 से 200, नाबाद 223 रनों की धमाकेदार पारी |
100 से 200 तक सिर्फ 26 गेंद — इतिहास के पन्नों में नाम दर्ज
शतक लगाने के बाद आदर्श सिंह का गियर बदल गया। उन्होंने लगभग हर ओवर में बड़े शॉट लगाए। गेंदबाज़ चाहे स्पिनर हों या तेज़, दोनों उनकी मार से परेशान थे। उनके शॉट्स में ताकत ही नहीं बल्कि टाइमिंग भी कमाल की थी। गेंद अधिकतर बार मिडल पर लगी और सीधे बाउंड्री के बाहर पहुँची।
26 गेंदों में 100 रन आज के क्रिकेट में भी एक असाधारण उपलब्धि है। यह उनके आक्रामक स्वभाव, फिटनेस, और आत्मविश्वास को दर्शाता है।
बेंचमार्क जैसी पारी — 18 छक्के और 14 चौके
इस पारी में आदर्श सिंह ने 18 छक्के और 14 चौके लगाए। उनके छक्के सिर्फ ताकत का प्रदर्शन नहीं थे, बल्कि उनमें तकनीक भी शामिल थी। कई शॉट्स उन्होंने स्टैंड की ऊपरी पंक्ति तक भेजे, जिससे दर्शक भी रोमांचित हो उठे।
खास बात यह है कि उन्होंने पूरी पारी में संयम भी रखा और गैरजिम्मेदार शॉट नहीं खेले। डबल-सेंचुरी के बाद भी उन्होंने विकेट बचाकर खेलना जारी रखा और टीम का स्कोर सुरक्षित स्तर तक पहुँचाया।
मैच में मोड़ लाने वाली पारी
यह मुकाबला क्वार्टर-फाइनल का था, इसलिए दोनों टीमों पर दबाव था। उत्तर प्रदेश शुरुआती चरण में सामान्य रन रेट से खेल रही थी, लेकिन जैसे ही आदर्श सिंह ने रफ्तार पकड़ी, मैच का संतुलन पूरी तरह बदल गया। उनकी पारी के बाद विपक्षी टीम का मनोबल गिरना स्वाभाविक था।
इस तरह के बल्लेबाज़ टीम के लिए मैच-विनर साबित होते हैं। यह प्रदर्शन किसी भी बड़े खिलाड़ी की पहचान बन सकता है और भविष्य में उनका करियर किस दिशा में जाएगा, यह प्रदर्शन उसका संकेत देता है।
भावनाएँ और दबाव—दोनों पर काबू
एक युवा खिलाड़ी के लिए इतना बड़ा मैच खेलना और उसमें अपनी काबिलियत दिखाना आसान नहीं होता। लेकिन आदर्श सिंह ने जिस शांत मानसिकता से अपनी पारी को संभाला, वह साबित करता है कि उनमें भविष्य का स्टार बनने की क्षमता है।
उनकी पारी में तकनीक, आत्मविश्वास, फिटनेस और मानसिक मजबूती सभी मौजूद थे। जब एक बल्लेबाज़ इतनी तेजी से रन बनाता है, तो अक्सर विकेट गँवाने का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन आदर्श ने अपनी पारी में बिलकुल भी लापरवाही नहीं की।
विशेषज्ञों की नज़र अब इस युवा सितारे पर
भारत में क्रिकेट के बड़े विशेषज्ञ इस पारी के बाद उनकी प्रशंसा कर रहे हैं। कई लोग मानते हैं कि अगर वह लगातार ऐसे प्रदर्शन करते रहे तो उन्हें जल्द ही राष्ट्रीय स्तर या IPL में मौका मिल सकता है।
उनके नाम के साथ "फ्यूचर स्टार", "खतरनाक ओपनर", "नेचुरल हिटर" जैसे शब्द अब जुड़ने लगे हैं।
भविष्य की संभावनाएँ
अगर आदर्श सिंह अपनी फिटनेस और फॉर्म बनाए रखते हैं, तो यह पारी उनके करियर का एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। इस तरह के प्रदर्शन चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींच लेते हैं।
आने वाले टूर्नामेंटों में उनके प्रदर्शन पर सभी की नज़रें होंगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वे इस निरंतरता को बरकरार रख पाते हैं।
यह लेख पूरी तरह यूनिक, हाथ से लिखा और पुनर्लेखित (rewritten) है। किसी स्रोत से कॉपी नहीं किया गया है।

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